Ashwani Bhardwaj / Sat, Feb 10, 2024 / Post views : 134
चंबा रूमाल पर दिखती है हिमाचल संस्कृति
ऐसा कहा जाता है जब मुगल शासन अपने आखिरी दौर में था, तो कई कलाकार दिल्ली छोड़कर पहाड़ी रियासत चंबा में आ गए थे। इन्हें चंबा के राजा उम्मेद सिंह ने अपनी रियासत में जगह दी थी, जबकि कुछ लोग चंबा रूमाल पहाड़ी संस्कृति का हिस्सा है यह कांगड़ा जिले की गुलेर रियासत से आया है। चंबा रूमाल में पेंटिंग्स में कृष्ण लीलाएं, महाभारत और रामायण से जुड़े चित्र, गणेश बंदना, शिव पार्वती से जुड़े चित्र प्रमुख हैं। इसके अलावा फूल पत्तियां और गद्दी -गद्दीन और भेड़ों की चित्रण प्रमुख हैं।
दोनों तरफ एक जैसा दिखता है चंबा रुमाल
चंबा रुमाल की खासियत एक और खासयित होती है। इस रूमाल में दोनों तरफ एक तरह की ही कलाकृति बनकर उभर कर सामने आती हैं। ऐसा किसी भी अन्य किसी शैली में देखने को नहीं मिलता है, जिसमें रुमाल में दोनों तरफ एक ही तरह का चित्र नजर आए, इसके लिए कारीगर महिलाओं को खासी मेहनत करनी पड़ती है। रेशम के धागे से सूती व रेश्मी कपड़े पर कढ़ाई होती थी। पूनम बताती हैं कि अब महिलाएं शाल, दुप्पटों, टोपियों और सिल्क फैब्रिक पर भी ये काम कर रही हैं। इसमें डबल साटन स्टिच (दो रुख टांका) का प्रयोग किया जाता है, जिसकी वजह से कपड़े के दोनों तरफ कढ़ाई उभर आती है जो एक समान लगती है। इसे बेहद आकर्षक फ्रैम में सजाकर बेचने के लिए बाजार में उतारा जाता है ताकि यह हमेशा आपके लिए कीमती बना रहे।
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