बड़साला/ऊना) — बसंत पंचमी का पावन पर्व राधास्वामी सत्संग दयालबाग की बड़साला (ऊना) ब्रांच में जनवरी 2026 को अत्यंत श्रद्धा, प्रेम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय ब्रांच के साथ-साथ मुख्यालय दयालबाग (आगरा) में भी भव्य और अलौकिक आयोजन किए गए।
ऐतिहासिक महत्व: शहतूत के पौधे से कॉलोनी की नींव
सत्संग जगत में इस दिन का दोहरा महत्व है। 1861 में बसंत पंचमी के दिन ही परम पुरुष पूरन धनी स्वामी जी महाराज ने पन्नी गली, आगरा में राधास्वामी सत्संग की शुरुआत की थी। इसके अलावा, 20 जनवरी 1915 को बसंत पंचमी के ही दिन 5वें गुरु (सर साहब जी महाराज) ने एक शहतूत (Mulberry) का पौधा लगाकर दयालबाग कॉलोनी की नींव रखी थी। इसलिए यह दिन दयालबाग कॉलोनी के स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
दयालबाग में दिखा दीपावली जैसा अद्भुत नजारा
मुख्यालय दयालबाग में देश-विदेश से आए हजारों अनुयायियों ने शिरकत की। यहाँ श्रद्धालुओं ने वक्त संत-सतगुरु डॉ. प्रेम सरन सत्संगी साहब के दर्शन और वचनामृत का आनंद लिया। पूरी कॉलोनी को एक दुल्हन की तरह सजाया गया था। विशेष बात यह रही कि सजावट में इको-फ्रेंडली और सोलर लाइट्स का प्रयोग किया गया, जिससे रात के समय वहां दीपावली जैसा अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
सेवा और खेलों की अनूठी परंपरा
दयालबाग में उत्सव की शुरुआत ब्रह्ममुहूर्त में खेतों में सेवा (Field Work) के साथ हुई, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने भाग लिया। इसके बाद पारंपरिक रूप से जिम्नास्टिक्स (Gymnastics), बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस और विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जो दयालबाग की “शिक्षा और शारीरिक विकास” की संस्कृति को दर्शाता है।
बड़साला ब्रांच में सांस्कृतिक कार्यक्रम
बड़साला ब्रांच में भी यह दिन एक उत्सव के रूप में मनाया गया। दिन के समय संगत ने दयालबाग से प्रसारित सत्संग का ऑनलाइन प्रसारण (Live Broadcast) देखा। ब्रांच सेक्रेटरी श्री संदीप कुमार ने बताया कि इस दौरान ब्रांच के बच्चों और युवाओं ने पूरे जोश के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। शाम को घरों में रोशनी की गई और विशेष रूप से बसंती मोमबत्तियां जलाकर खुशी का इजहार किया गया।
