Ashwani Bhardwaj / Mon, Apr 13, 2026 / Post views : 41
सरकाघाट (मंडी): हिमाचल प्रदेश के शांत माने जाने वाले जिला मंडी के सरकाघाट उपमंडल में सोमवार सुबह एक ऐसी जघन्य वारदात हुई, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक 19 वर्षीय होनहार कॉलेज छात्रा, सिया गुलेरिया, की उसके ही गांव के एक सिरफिरे युवक ने सरेआम दराट (तेजधार हथियार) से हमला कर हत्या कर दी।
नैण गांव की रहने वाली सिया गुलेरिया पुत्री जोगिंद्र कुमार, रोज़ की तरह अपने भविष्य के सपने संजोए कॉलेज के लिए घर से निकली थी। घर से मात्र एक किलोमीटर दूर, गोपालपुर के पास एक सुनसान रास्ते पर, हुड पहने एक युवक ने घात लगाकर उस पर हमला किया।
निर्मम हमला: प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के अनुसार, युवक ने पहले सिया की बाजू पर वार किया जिससे वह नीचे गिर गई। इसके बाद बेरहमी से उसकी गर्दन पर दराट से कई वार किए गए, जिससे मौके पर ही अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।
चीखें और दहशत: सिया की चीखें सुनकर जब तक स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, हत्यारा खेतों के रास्ते फरार हो चुका था। सड़क पर बिखरा खून और सिया का बेजान शरीर देखकर पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
वारदात की सूचना मिलते ही एसपी और एएसपी मंडी तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की और कुछ ही घंटों के भीतर आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित उसी गांव का निवासी बताया जा रहा है जो हत्या के बाद छिप गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में मामला 'एकतरफा प्यार' और सनक का लग रहा है। सिया द्वारा युवक को नजरअंदाज करने या इनकार करने पर उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।
यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे की विफलता है। आज हमें सिया की मौत पर शोक मनाने के साथ-साथ इन कड़वे सवालों के जवाब ढूंढने होंगे:
'ना' का मतलब 'ना' होता है: हमें अपने बेटों को यह सिखाना होगा कि किसी भी रिश्ते में जबरदस्ती या हिंसा की कोई जगह नहीं है। अगर कोई लड़की आपके प्रस्ताव को ठुकराती है, तो उसका सम्मान करना ही असली परवरिश है।
सनकी मानसिकता पर नजर: समाज और परिवार को अपने आस-पास ऐसे युवकों की पहचान करनी होगी जो हिंसक प्रवृत्तियां दिखा रहे हैं। 'एकतरफा प्यार' के नाम पर किसी की जान लेना मर्दानगी नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक विकार और कायरता है।
बेटियों की सुरक्षा और हमारा दायित्व: देवभूमि में अगर बेटियां घर से कॉलेज जाते समय सुरक्षित नहीं हैं, तो हम किस प्रगति की बात कर रहे हैं? अपराधियों के मन में कानून का ऐसा खौफ होना चाहिए कि वे ऐसी हैवानियत के बारे में सोच भी न सकें।
निष्कर्ष: सिया गुलेरिया एक मेधावी छात्रा थी और राजनीति में भी सक्रिय थी। उसके पिता बद्दी में ट्रक चलाकर अपनी बेटी के उज्जवल भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे थे। आज उस पिता का संघर्ष और सिया के सपने, एक सिरफिरे की सनक की भेंट चढ़ गए।
समय आ गया है कि हम केवल मोमबत्तियां न जलाएं, बल्कि अपने घर के लड़कों को 'संस्कार' और 'सम्मान' की शिक्षा दें ताकि भविष्य में कोई और 'सिया' इस दरिंदगी का शिकार न हो।
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