Ashwani Bhardwaj / Fri, Mar 20, 2026 / Post views : 196
शिमला/ऊना, संवाददाता:
हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी आंकड़ों और रोड सेफ्टी रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य में औसतन हर दिन 6–7 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें 2 से 3 लोगों की जान जा रही है। पहाड़ी सड़कों पर तेज रफ्तार, लापरवाही और नियमों की अनदेखी इन हादसों की मुख्य वजह बनकर सामने आ रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में प्रदेश में कुल 2597 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 864 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2023 में भी हादसों का आंकड़ा 2500 के पार रहा, जिससे साफ है कि स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। हालांकि हाल के वर्षों में आंकड़ों में मामूली कमी आई है, लेकिन बड़े हादसों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत में ही शिमला जिले में दो महीनों के भीतर 42 सड़क हादसे दर्ज किए जा चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल में अधिकतर दुर्घटनाएं तेज रफ्तार, आमने-सामने की टक्कर (हेड-ऑन कोलिजन), और खराब मौसम के दौरान वाहन के अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गिरने के कारण होती हैं। इसके अलावा नाबालिगों को वाहन सौंपना, बिना लाइसेंस वाहन चलाना और वाहन की उचित जांच न करना भी हादसों को बढ़ावा दे रहे हैं।
जिला स्तर पर चंबा, मंडी, शिमला और सोलन ऐसे क्षेत्र हैं जहां सड़क हादसों की संख्या अधिक दर्ज की जा रही है। वहीं स्थानीय स्तर पर कुछ स्थान लगातार दुर्घटनाओं के केंद्र बनते जा रहे हैं। ऊना क्षेत्र में अम्बोटा का चौक, मुबारिकपुर से दौलतपुर जाने वाली खतरनाक उतराई तथा कारलुही क्षेत्र ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां बार-बार हादसे हो रहे हैं। इन स्थानों पर तेज रफ्तार, ब्लाइंड टर्न और यातायात नियमों की अनदेखी मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाएं और नाबालिगों को वाहन न दें। साथ ही ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष:
हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसे एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुके हैं। यदि समय रहते सख्त कदम और जनजागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
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