Ashwani Bhardwaj / Wed, Apr 1, 2026 / Post views : 50
शिमला/ऊना | ब्यूरो रिपोर्ट: अश्वनी भारद्वाज (ऊना No. 1)
हिमाचल-पंजाब बॉर्डर: पिछले कुछ दिनों से हिमाचल और पंजाब की सीमाओं पर जो मंजर दिख रहा है, वह किसी बड़े संकट से कम नहीं है। सरकारें अपनी जगह शांत हैं, लेकिन सड़कों पर निजी गुटों और प्रदर्शनकारियों ने मोर्चा खोल रखा है। ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, चक्का जाम हो रहा है और आम जनता घंटों जाम में फंसने को मजबूर है। सवाल यह है कि आखिर कानून व्यवस्था कहाँ है?
हिमाचल सरकार द्वारा बाहरी राज्यों के वाहनों पर लगाए गए 'एंट्री टैक्स' को लेकर विवाद शुरू हुआ। हालांकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जनता की मांग पर प्रस्तावित बढ़ोतरी को वापस लेते हुए टैक्स को कम कर दिया है, लेकिन फिर भी पंजाब के कुछ संगठनों ने धरने प्रदर्शन जारी रखे हैं। बॉर्डर पर गाड़ियाँ रोकी जा रही हैं, जिससे व्यापार और पर्यटन दोनों ठप पड़ रहे हैं।
अगर निष्पक्ष होकर देखा जाए, तो हिमाचल का टैक्स पंजाब के मुकाबले काफी कम बैठता है। आइए इस गणित को समझें:
हिमाचल का मॉडल: हिमाचल में प्रवेश करने पर एक प्राइवेट कार को लगभग ₹100 (एंट्री टैक्स) देना होता है। यह शुल्क पूरे दिन के लिए मान्य होता है। यानी एक बार एंट्री करो और पूरे हिमाचल में कहीं भी घूमो, दोबारा टैक्स नहीं देना।
पंजाब का मॉडल: पंजाब में हाईवे पर कदम-कदम पर टोल प्लाजा हैं। अकेले लाडोवाल टोल (Ladowal) पर एक कार का एक तरफ का शुल्क ₹225 है। अगर कोई व्यक्ति चंडीगढ़ से अमृतसर जाता है, तो उसे कई टोल पार करने पड़ते हैं, जिसका कुल खर्च ₹500 के पार निकल जाता है।
निष्कर्ष: पंजाब के नेशनल हाईवे पर सफर करना, हिमाचल की एकमुश्त ₹100 की एंट्री फीस से कहीं ज्यादा महंगा है। इसके बावजूद, बवाल हिमाचल के नाम पर काटा जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ निजी लोग और यूनियनें अपनी राजनीति चमकाने के लिए आम मुसाफिरों की गाड़ियाँ रोक रहे हैं। इससे न केवल मरीजों और एम्बुलेंस को दिक्कत हो रही है, बल्कि हिमाचल और पंजाब के आपसी भाईचारे पर भी असर पड़ रहा है।
"अगर सरकार की नीतियों में कमी है, तो उसे मेज पर बैठकर सुलझाया जाना चाहिए। सड़कों को बंधक बनाकर आम जनता को परेशान करना समाधान नहीं है। प्रशासन को सख्ती दिखानी होगी ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।" — अश्वनी भारद्वाज, स्वतंत्र पत्रकार (ऊना No. 1)
समान टैक्स नीति: दोनों राज्यों को बैठकर एक बीच का रास्ता निकालना चाहिए ताकि बॉर्डर पर रहने वाले लोगों को बार-बार टैक्स न देना पड़े।
प्रशासन की सख्ती: जो लोग अवैध रूप से जाम लगा रहे हैं और गाड़ियाँ रोक रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
जागरूकता: जनता को यह समझने की जरूरत है कि हिमाचल का ₹100 का टैक्स पंजाब के ₹225+ के टोल के मुकाबले कम ही है।
अश्वनी भारद्वाज, ऊना No. 1 (शिमला से विशेष रिपोर्ट)
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